आशिक हत्याकांड:-हत्यारे पिता-पुत्र को आजीवन कारावास
-वर्ष 2021 किच्छा कोतवाली में हुई थी वारदात
-तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश ने सुनाया फैसला
ख़बर तफ्तीश रुद्रपुर।
कोतवाली किच्छा इलाके में वर्ष 2021 में हुए जघन्य मोहम्मद आ शिक हत्याकांड के हत्यारे पिता-पुत्र को कठोर आजीवन कारावास की सजा सु नाई गई,जबकि तीसरे किशोर हत्यारोपी का मामला किशोर न्यायालय में विचा राधीन है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीले सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी लक्ष्मी नारायण पटवा ने बताया कि वार्ड-सात किच्छा निवासी आसिफ ने मुकदमा पंजीकृत कराया था कि उस का भाई मोहम्मद आशिक मंडी में आढत लगाकर मछली का धंधा करता है और 18 नवंबर 2021 की सुबह साढे नौ बजे भाई आढत जाता है कि तभी नईम और उसका बेटा क्षिमाल और अलीक्षाद उर्फ बबी आता है और जबरन आढत के साम ने तख्त डाल देता है। जब भाई ने विरोध किया,तो बेटों की ललकार पर पिता ने धारदार पाटल से भाई के सिर पर कई प्रहार कर डाले। लहुलूहान हालत में भाई को अस्पताल ले जाया गया। प्रारंभिक तौर पर पुलिस ने हत्या के प्रयास का माम ला पंजीकृत किया था,लेकिन कुछ दिन पर उपचार के दौरान आशिक की मौत हो गई और मामला हत्याकांड में तरमीम हो गया। हत्याकांड की सुनवाई तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश चंद्र आर्य की अदालत में हुई। जहां एडीजीसी ने 21 गवाह पेश किए। दोनों पक्षों की दलीले सुनने के बाद अदालत ने हत्यारे नईम औ र उसके बेटे क्षिमाल को सश्रम आजीवन कारावास और दस-दस हजार का अर्थ दंड देने की सजा सुनाई,जबकि अलीशाद उर्फ बबी का मामला किशोर न्यायाल य में विचाराधीन है।

-वर्ष 2021 किच्छा कोतवाली में हुई थी वारदात
-तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश ने सुनाया फैसला
ख़बर तफ्तीश रुद्रपुर।
कोतवाली किच्छा इलाके में वर्ष 2021 में हुए जघन्य मोहम्मद आ शिक हत्याकांड के हत्यारे पिता-पुत्र को कठोर आजीवन कारावास की सजा सु नाई गई,जबकि तीसरे किशोर हत्यारोपी का मामला किशोर न्यायालय में विचा राधीन है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीले सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी लक्ष्मी नारायण पटवा ने बताया कि वार्ड-सात किच्छा निवासी आसिफ ने मुकदमा पंजीकृत कराया था कि उस का भाई मोहम्मद आशिक मंडी में आढत लगाकर मछली का धंधा करता है और 18 नवंबर 2021 की सुबह साढे नौ बजे भाई आढत जाता है कि तभी नईम और उसका बेटा क्षिमाल और अलीक्षाद उर्फ बबी आता है और जबरन आढत के साम ने तख्त डाल देता है। जब भाई ने विरोध किया,तो बेटों की ललकार पर पिता ने धारदार पाटल से भाई के सिर पर कई प्रहार कर डाले। लहुलूहान हालत में भाई को अस्पताल ले जाया गया। प्रारंभिक तौर पर पुलिस ने हत्या के प्रयास का माम ला पंजीकृत किया था,लेकिन कुछ दिन पर उपचार के दौरान आशिक की मौत हो गई और मामला हत्याकांड में तरमीम हो गया। हत्याकांड की सुनवाई तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश चंद्र आर्य की अदालत में हुई। जहां एडीजीसी ने 21 गवाह पेश किए। दोनों पक्षों की दलीले सुनने के बाद अदालत ने हत्यारे नईम औ र उसके बेटे क्षिमाल को सश्रम आजीवन कारावास और दस-दस हजार का अर्थ दंड देने की सजा सुनाई,जबकि अलीशाद उर्फ बबी का मामला किशोर न्यायाल य में विचाराधीन है।
