तराई वन प्रभाग के जंगलों में होगा,एआई तकनीक का पहरा
-एआई आधारित कैमरे-ट्रैकिंग सिस्टम से होगे लैस
-वन प्रभाग ने शुरु की कवायद,पत्राचार हुआ शुरु
खबर तफ्तीश रुद्रपुर।
तराई भाबर के घने जंगलों में विचरण करने वाले वन्यजीवों की सुरक्षा और लकड़ी तस्करी की रोकथाम को लेकर तराई वन प्रभाग ने जंगलों को हाईटेक बनाने की कवायद शुरु कर दी है। जंगलों में ए.आई जैसी आधुनिक तकनीक और तस्करों की निगहबानी के लिए ट्रैकिंग सिस्टम लगाने का फैसला लिया है और इसका एक प्रस्ताव बनाकर शासन स्तर पर पत्राचार भी शुरू कर दिया। शासन की हरी झंडी मिलते ही तराई भावर के जंगल सुरक्षित होगा और तस्कर तीसरी आंख के दायरे में आएगे।
बताते चले कि तराई वन प्रभाग को पूर्वी और पश्चिमी तराई प्रभाग में बांटा गया है। चूंकि तराई भावर के जंगली इलाकों की बात करे। तो अक्सर तस्करों से मुठभेड़,लकड़ी की तस्करी और वन्य जीवों की हत्या जैसी घटना होती रहती है। जिसको लेकर तराई वन प्रभाग ने जंगलों को हाईटेक बनाने का फैसला लिया और जंगलों में एआई आधारित कैमरे के अलावा रियल टाइम ट्रे किग सिस्टम व्यवस्था लागू करने की कवायद शुरु कर दी है। एआई आधारित कैमरे एक आधुनिक उपकरण है। जो दिन-रात के अलावा किसी भी गतिविधि को बड़ी ही आसानी से कैद कर वीडियो-फोटो कंट्रोल रूम को भेज सकती है और रियल टाइम ट्रैकिंग सिस्टम किसी भी तस्कर की सही लोकेशन को बताते हुए मोबाइल पर प्रदर्शित करती है। यह सिस्टम एक मोबाइल ऐप है। जिसके माध्यम से आसानी से जीवों की निगरानी और तस्करों की बेहतर जानकारी दे सकती है। जिसको लेकर वन प्रभाग ने एक रिपोर्ट भी तैयार कर शासन को भेज दी है।
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कैसे करेंगे आधुनिक उपकरण काम
रुद्रपुर। एआई आधारित कैमरे दिन हो या रात। जंगल में विचरण कर रहे वन्य जीवों की आवाजाही की सही लोकेशन कैद करता रहता है और जैसे ही वन्यजीव सड़क या भटकते हुए रिहायशी इलाके में जाता है। तो फौरन ए आई कैमरा जीव की लोकेशन विभाग को भेज देता है। इसी प्रकार रियल टाइम ट्रैकिंग सिस्टम भी वन्यजीव हो या फिर वन तस्कर को कैद कर उस की कार लोकेशन या फिर उनके छिपे रहने का सही लोकेशन मोबाइल ऐप पर भेजता रहता है और सचल दल उसका पीछा करता रहता है।
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शासन स्तर पर हो रहा है पत्राचार
रुद्रपुर। डीएफओ यूसी तिवारी ने बताया कि कुछ संस्थाओं के मदद से टांड वन रेज के चार हाईटेक कैमरे लगाए गए है,लेकिन तराई वन प्रभाग का ज्यादातर जंगल का हिस्सा अभी खाली है। जिसको लेकर पिछले माह भी एक प्रस्ताव और रिपोर्ट शासन को भेजी है और एआई आधुनिक कैमरे के अलावा रियल टाइम ट्रैकिंग सिस्टम ऐप को मुहैया कराने का आग्रह भी किया है। उम्मीद है कि शासन मंजूरी देगा और तराई के जंगल सुरक्षित हो जाए गें।
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