जीएसटी ने रचा 3500 पन्नो की एफआईआर का इतिहासजीएसटी ने रचा 3500 पन्नो की एफआईआर का इतिहास
-सात सदस्य दो माह तक करते रहे मशक्कत
-उत्तराखंड की सबसे बड़ी थीं एफआईआर
मनोज आर्या,रुद्रपुर।
100 करोड़ टर्नओवर और 18 करोड़ की जीएसटी चोरी का पर्दाफाश करते वक्त जीएसटी की विशेष जांच ब्यूरो को यह नहीं पता था कि उनकी यह कार्रवाई उत्तराखंड की सबसे बड़ी एफआईआर का इतिहास रचेगी,क्योंकि टैक्स चोरी प्रकरण में दिन-रात मेहनत कर अधिकारियों ने 3500 पन्नों की एफ आई आर की रिपोर्ट तैयार की थी। जो कि प्रदेश की सबसे बड़ी एफआईआर मानी जाती है।
अक्टूबर 2023 को सात सदस्यीय एसआईबी की टीम ने जसपुर की सबसे बड़ी लकड़ी मंडी में छापा मारा और पाया कि लकड़ी माफिया द्वारा 90 से अधिक फर्जी फर्म पर 100 करोड़ से अधिक टर्नओवर का कारोबार किया और जीएसटी पोर्टल पर कारोबार शून्य दिया और 18 करोड़ की जीएसटी चोरी हो चुकी थी। तहरीर के आधार पर मुकदमा पंजीकृत होता है और जांच के लिए जीएसटी विभाग के तेज तर्रार सात अधिकारियों की टीम बनी और 52 से 58 दिन बाद टी 90 से अधिक फर्जी फर्म चिह्नित किए और 18 करोड़ जीएसटी चोरी प्रकरण में 3500 पन्नों की एफआईआर पंजीकृत हुई। यह एफआईआर जांच रिपोर्ट डेटा मिसमैच की पहचान,जीएसटी पोर्टल के ऑटोमेटिक सिस्टम,टैक्स क्रेडिट और बिक्री के आंकड़ों में बड़ा अंतर,फर्जी फर्मे,जमीनी स्तर पर दस्तावेजों की जांच के आधार पर हुई। यहीं कारण है कि 3500 पन्नों की एफआईआर को उत्तराखंड की सबसे बड़ी एफआईआर मानी गई और जीएसटी विभाग को इसका रचनाकार माना गया। जो कि चर्चा का विषय भी रहा।
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कैसे पकड़ में आया था मामला
रुद्रपुर। 18 करोड़ की जीएसटी चोरी प्रकरण का मामला ई-वे बिल और लॉजिस्टिक्स की जांच,बैंक खातों और फंड ट्रेल का मिलान,आधुनिक जीएसटी पोर्टल में कारोबार शून्य और धरातल पर 100 करोड़ से अधिक टर्नओवर का कारोबार होना सहित कई ऐसे बिदु थे। जिसके आधार पर एसआईबी ने मान लिया था कि बोगस फर्मों के आधार पर टैक्स चोरी हो रही है और तभी से गोपनीय जांच शुरू हुई और टैक्स चोरी का पर्दाफाश हुआ।
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वास्तव में बेहद जटिल-मेहनत भरी थी जांच
रुद्रपुर। डिप्टी कमिश्नर इशान खान ने बताया कि 100 करोड़ से अधिक कारोबार होने के बाद भी 18 करोड़ की जीएसटी चोरी करने का मास्टरमाइंड शाहनवाज हुसैन था। जिसने फर्जी कारोबारियों का एक नेटवर्क खड़ा किया था। यहीं कारण है कि 90 फर्जी फर्म का सत्यापन और बारीकियां इतनी जटिल और मेहनत भरी थी कि जांच करीब दो माह तक चली और 3500 पन्नों की एफआईआर दर्ज हुई।