राष्ट्रीय लोक अदालत ने हल्का किया अदालतों का बोझराष्ट्रीय लोक अदालत ने हल्का किया अदालतों का बोझ
-प्री लिटिगेशन मामलों का होता है फौरन निदान
-एक साल में 20 हजार से अधिक मामले निपटे
खबर तफ्तीश रुद्रपुर।
अक्सर देखने को मिला है कि प्री लिटिगेशन यानी पूर्व मुकदमे बाजी के कारण ऊधमसिंह नगर के अदालतों में ऐसे मामले लंबित है। जिनको आपसी समझौते के आधार पर आसानी से निपटा  सकता है,लेकिन मतभेद के कारण मामले लंबित रहते है और विधिक कार्रवाई का बोझ बढ़ जाता है। हालांकि राष्ट्रीय लोक अदालत ने अदालतों का बोझ काफी हद तक कम कर दिया है।
मार्च 1982 में भारत में पहली बार लोक अदालत गुजरात में हुई और कानूनी मान्यता नौ नवंबर 1995 में प्रभावी ढंग से लागू हुई। जिसका दायित्व विधिक सेवा प्राधिकरण को सौपा गया और देखते ही देखते लोक अदालत राष्ट्रीय लोक अदालत में बदल गई और काफी हद तक अदालतों का बोझ कम होने लगा। अगर जनवरी से दिसंबर 2025 के आंकड़ों पर नजर डाले। तो एक वर्ष के भीतर ऊधमसिंह नगर में 20 हजार से अधिक वादो का निपटारा आपसी समझौते के आधार पर हुआ है। जिसमें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की देखरेख में जिले के सभी अदालतों ने भी अहम किरदार निभाया और वादी-प्रतिवादी की काउंसलिंग कर आपसी समझौते के आधार पर वाद निपटारा किया।
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शमनीय मामले की होती है सुनवाई
रुद्रपुर। वर्ष 2025 के आंकड़ों पर नजर डाले,तो राष्ट्रीय लोक अदालत में शमनीय अपराध मामले, यातायात चालान,राजस्व प्रकरण,बैक रिकवरी,चेक बाउंस के मामले ज्यादा देखने को मिली। राष्ट्रीय लोक अदालत में वादी और प्रतिवादी आसानी से अदालत के सामने प्रस्तुत हो सकता है और आपसी मतभेद को दूर कर या फिर आपसी समझौते के आधार पर मामला निपटा रहा है।
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वाद निस्तारण में कारगर है लोक अदालत
रुद्रपुर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ममता पंत ने बताया कि प्रदेश में हर साल उच्च न्यायालय के आदेशानुसार राष्ट्रीय लोक अदालत की सुनवाई होती है। वर्ष 2025 में 20 से अधिक मामलों का निस्तारण हुआ है और इस वर्ष भी प्राधिकरण का प्रयास है। अदालतों में लंबित मामलों का निस्तारण शत फीसदी हो। ताकि वादी और प्रतिवादी को समय रहते न्याय मिले। प्राधिकरण का प्रयास जारी है,क्योकि लोक अदालत वास्तव में कारगर साबित हो रही है।
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