पहली बार 11 लाशों से थर्रा उठा रुद्रपुर पोस्टमार्टम हाउस
-करीब 25 सालों में नही देखा ऐसा मंजर
-आठ घटे विच्छेदन,छुटे डॉक्टर-कर्मी के पसीने
खबर तफ्तीश, रुद्रपुर।
मंगलवार की देर रात ऒर बुधवार की सुबह वास्तव में ख़ौफ़नाक मंजर के लिए जानी जाएगी,क्योंकि उत्तराखंड गठन के बाद पिछले 25 सालो में रुद्रपुर का पोस्ट मार्टम पहली बार थर्रा उठा। चारो तरफ़ अपनों के खोने का दर्द और चीखपुकार से गूँजता पोस्टमार्टम हाउस हर किसी को विचलित कर रहा था। वही एक साथ 11 शवों का शव विच्छेदन करने में डॉक्टर और पोस्टमार्टम कर्मी के पसीने छूट गए। वही हादसों को लेकर लोगों की तीखी प्रक्रिया भी सामने आई।
दरअसल नो नवंबर 2000 को उत्तराखंड राज्य का निर्माण हुआ और औधोगिक स्थापना के साथ ही विकास की इबादत भी शुरू हुई और हाइवे पर ओवर लोड भारी वाहन भी काल बनकर दौड़ते रहे। एक कोई नही होता होगा। जब ज़िले में सड़क हादसों में कोई जिंदगी नही जाती होगी। रुद्रपुर मुख्यालय के पोस्टमार्टम हाउस की बात करे। तो ऐसा कोई दिन होता होगा। जब एक या दो पोस्टमार्टम नही होते होंगे। अगर कुछ साल पहले के आंकड़ों की बात करें। तो महज एक दफा पाँच शवों का विच्छेदन हुआ,लेकिन मंगलवार की रात कोतवाली रुद्रपुर, कोतवाली पंतनगर के अलावा करीब आठ सडक हादसों और तीन आत्म हत्या की घटनाएं हुईं और एक ही रात पोस्टमार्टम हाउस में 11 शव विच्छेदन को लाए गए और बुधवार की सुबह जैसे ही शवो का मेमो जिला अस्पताल पहुँचा। वैसे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। सुबह दस बने एक डॉक्टर को भेजा गया और सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक लगातार डॉक्टर और पोस्ट पोस्ट मार्टम कर्मी शवो का विच्छेदन करते रहें। वास्तव में 11 शवों को देखकर स्वास्थ्य विभाग के पसीने छूट गए।
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भयावह था बुधवार का मंजर
रुद्रपुर। शव विच्छेदन कर्मी मनीष कुमार ने बताया कि वास्तव में बुधवार पोस्टमार्टम हाउस का मंजर भयावह था। पिछले कई सालों की ड्यूटी में महज अधिकतम पाँच शवों का एक ही दिन पोस्टमार्टम किया था,लेकिन बुधवार को 25 सालो में पहली बार लगातार 11 शवों का पोस्टमार्टम हुआ। हालात यह थे कि एक शव पर आधा घटा लग रहा था ऒर डॉक्टर और वह खुद बिना खाए पीए कार्य कर रहे थे।
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नेताओं की भी देखने को मिली प्रतिक्रिया
रुद्रपुर। बुधवार को सोशल मीडिया पर चली 11 शवों के पोस्ट मार्टम खबर को देखते ही भाजपा प्रवक्ता राजेश शुक्ला, पूर्व विधायक राज कुमार ठुकराल, विधायक शिव अरोड़ा सहित कई नेता भी सांत्वना देने गए और सड़क हादसों के बढ़ते ग्राफ पर तीखी प्रतिक्रिया जताई। नेताओं का कहना था कि पुलिस हो या जिला प्रशासन सड़क हादसो की रोकथाम को कारगर कदम उठाए। अन्यथा लोगो के ग़ुस्से का सामना करने की तैयारी भी कर लें।
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