जन्म और अश्व का हुनर दिलाते हैं नई पहचानजन्म और अश्व का हुनर दिलाते हैं नई पहचान
-बोर्ड करता है तथ्यों का मूल्यांकन
-फिर घुड़सवार दस्ते में दर्ज होता है नाम
खबर तफ्तीश बरूद्रपुर।
घुड़सवार पुलिस दस्ते में शामिल होने वाले अश्वो का जन्म और उसका खुद का हुनर ही घुड़सवार पुलिस दस्ते में शामिल अश्व को नई पहचान और नाम दिलाता हैं। सभी तथ्यों का मूल्यांकन करने के बाद ही घुड़सवार पुलिस दस्ता बोर्ड अश्व का नाम रखता है और वही नाम आखिरी सांस तक चलता है।
पुलिस विभाग का अभिन्न अंग कहे जाने वाले घुड़सवार पुलिस दस्ता में शामिल अश्वो को पुलिस लाइन हो या फिर जिले के किसी भी पुलिस अस्तबल में रखने से पहले बाकायदा अश्वो की जन्मतिथि के आधार पर नामकरण होता हैं। नियमानुसार जैसे ही पुलिस ट्रेनिग सेंटर से ट्रेंड अश्वो को अस्तबल लाया जाता हैं। तो उसका बाकायदा प्रगति रिपोर्ट भी संलग्न होती हैं और घुड़सवार पुलिस दस्ता बोर्ड़ हर साल बैठता हैं। इसके बाद रिपोर्ट, हुनर और जन्मतिथि के आधार पर नर और मादा अश्वो का नाम रखा जाता हैं और अश्वो की पूरी डिटेल सरकारी कागज़ी कार्रवाई में दर्ज होती हैं।  यही वजह हैं कि पुलिस लाइन स्थित अस्तबल में आकाश,अशोक,विजय लक्ष्मी,चंचल और नीलम नाम के अश्व बेड़े में शामिल है।
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अस्तबल में बनी होती हैं बेरिग
रूद्रपुर। जिस प्रकार पुलिस कर्मियों के रहने के लिए बाकायदा बेरिग होती हैं और बाहर नामों की सूची चस्पा की जाती हैं। उसी तरह से अस्तबल रहने वाले प्रत्येक अश्व के नाम से रहने का।कमरा नुमा स्थान होता हैं और दीवार पर अश्व का नाम,जन्म,बेड़े में शामिल होने की तिथि के साथ उसकी आयु भी अंकित होती हैं।
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बोर्ड में होते है सभी सदस्य
रूद्रपुर। सीओ लाइन डीआर वर्मा ने बताया कि जब किसी भी अश्व को घुड़सवार सवार बेड़े में लाया जाता है। तो घुड़सवार सवार बोर्ड में पुलिस अधिकारी,डॉक्टर,अस्तबल प्रभारी के साथ ही पूरी टीम होती हैं।  जो स्वास्थ्य जांच के साथ ही हर पहलुओं को परखने के बाद नामकरण करती हैं यही घुड़सवार नियमावली हैं।
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