पीपल पेड का अस्तित्व समाप्त,60 साल से देता था ठंडी छाव
-झाडी वाले शिव बाबा मंदिर था आस्था का केंद्र
-एनएच चौडीकरण की जद में आया था पीपल पेड
ख़बर तफ्तीश रुद्रपुर।
जहां पिछले छह दशकों से राहगीर हो या फिर आम जनमानस। भी षण गर्मी में लोगों को ठंडी छाव देने वाले झाडी वाले शिव मंदिर स्थल पर लगे विशा लकाय पीपल पेड का अस्तित्व समाप्त हो गया,क्योकि नैनीतल-रामपुर हाईवे चौडी करण की जद में आए पीपल पेड को काट दिया गया। जिसको लेकर मंदिर संचाल क कमेटी ने भी नाराजगी जताई और दूसरे स्थान पर विधिविधान के साथ स्थापित करने का मुददा उठाया,क्योकि झाडी वाले शिव मंदिर आस्था का केंद्र भी था।
बता दे कि 60 साल पहले शहर के मुख्य चौराहे डीडी चौक से चंद कदमों की दूरी पर झाडियों में एक शिवलिंग रखा हुआ था और उसके ऊपर एक पीपल का पेड भी था। तत्कालीन शिव भक्त बनवारी लाल ने शिवलिग को देखा और ईट-पत्थर से छोटा सा मंदिर बना दिया और मदिर झाडी वाले शिव मंदिर के नाम से विख्यात हो ग या। कई लोगों की मन्नत भी पूर्ण हुई और 1991 में मंदिर के पुजारी बनवारी लाल का स्वर्गवास हो गया। तो उनके बेटे नरेश पाल ने पूजा पाठ शुरु करते हुए मंदिर के अस्तित्व को जिंदा रखा,लेकिन जैसे ही रामपुर-नैनीताल हाईवे चौडीकरण का कार्य प्रारंभ हुआ। तो झाडी वाले शिव मंदिर और विशालकाय पीपल पेड के अस्तित्व पर खतरा मडराने लगा और सोमवार की सुबह एनएच अधिकारियों की मौजूदगी में वि शालकाय पीपल पेड को काटकर धराशायी कर दिया। हालांकि मंदिर संचालक औ र स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया,लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
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बोले मंदिर संचालक,स्थापित हो मंदिर
रुद्रपुर। वर्तमान झाडी वाले शिव मंदिर के संचालक नरेश पाल ने बताया कि एनएच द्वारा कोई भी नोटिस नहीं दिया था। बताया कि पीपल पेड के काटे जाने के बाद मंदिर के अस्तित्व पर भी खतरा मडरा रहा है और पीपल पेड वास्तव में लोगों को ठंडी छाव देता था। उन्होंने शासन-प्रशासन से त्रिशुल हो या फिर डमरु चौक पर झाडी वाले शिव मंदिर को स्थापित करने और पुन: एक पीपल पेड लगाने का मुददा उठाया। कहा कि यदि उनकी मांग पर गौर नहीं किया। तो आंदोलन किया जाएंगा।
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बच्चे की बरामदगी के बाद बढी आस्था
रुद्रपुर। झाडी वाले शिव मंदिर के प्रति आस्था उस वक्त बढ़ी। जब कुछ साल पहले पीलीभीत के रहने वाले पीके अग्रवाल का बेटा डेढ साल से लापता था और उनके द्वारा झाडी वाल शिव मंदिर आकर पुकार लगाई और कुछ दिन बाद ही बेटा घर लौटकर आया। उसी दिन से मंदिर के प्रति लोगों की अटूट आस्था देखने को मि ली और हर साल शिव रात्रि पर ऐतिहासिक धार्मिक अनुष्ठान होने लगा।
