मानव तस्करी:-यूडीएन-चंपावत है बेहद सवेदनशील जिला
-कुमाऊ में तीन सालों में आए 550 मामले
-देह व्यापार,बालश्रम से जुड़े हैं मामले
खबर तफ्तीश ,रुद्रपुर।
उत्तराखंड कुमाऊँ का इलाका। जितना खूब सूरत वादियों के जाना जाता हैं। उतना ही मानव तस्करी के लिए बेहद सवेदनशील हैं,क्योंकि राष्ट्रीय या फिर अंतरराष्ट्रीय सीमा इसकी गंभीरता को बढ़ा देता है। यही वजह है कि उधमसिंह नगर ऒर चंपावत जिले को सवेदनशीलता की श्रेणी में रखा गया है और सैकड़ों मामले पिछले तीन सालों में सामबे भी आए हैं।
मानव तस्करी यानि युवक युवतियों, किशोर-किशोरियों को नोकरी का झांसा या फिर आर्थिक तंगी का फायदा उठाकर जबरन देह व्यापार का धंधा में धकेल दिया जाता हैं और बालश्रम भी कराया जाता हैं। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में कुमाऊँ मंडल में 173,वर्ष 2025 में 207 और वर्ष 2026 के छह माह में ही 170 मामले सामने आए हैं। जानकारों का मानना है कि मानव तस्करी का मुख्य वजह गरीबी और बेरोजगारी हैं। जिसका फायदा उठाकर गिरोह भोले भाले युवाओं को अपने जाल में फँसाते हैं और नेपाल हो या फिर यूपी की गोपनीय रास्तों से ले जाते हैं,क्योंकि चंपावत से सटा नेपाल बोर्डर और उधमसिंह नगर से यूपी की सीमा लगती हैं। हालांकि पुलिस लगातार रोकथाम के प्रयास कर रही हैं। वाबजूद इसके मानव तस्करी में यूडीएन और चंपावत बेहद सवेदनशील हैं। सामने आए मामलों में सबसे ज्यादा मामले बाल श्रम और देह व्यापार के है।
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कोड़
पुलिस करती है लगातार धरपकड़
रूदपुर। एसएसपी अजय गणपति कुंभार ने बताया कि यह सत्य है कि सीमावर्ती इलाकों से मानव तस्करी होने के संकेत मिलते हैं। बावजूद इसके उधम सिंह नगर पुलिस बनबसा और चंपावत पुलिस से तालमेल बनाकर धरपकड़ करती रहती हैं। जिस वजह से यूडीएन और चंपावत जिला सवेदनशील हैं और मानव तस्करी की रोकथाम के लिए हर संभव कोशिश होती रहती हैं।
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