गुरपेज-गुरकीरत हत्याकांड में हत्यारे को आजीवन कारावासगुरपेज-गुरकीरत हत्याकांड में हत्यारे को आजीवन कारावास
-दरोगा भाई राजेश को छह माह की सजा
-तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश ने सुनाया फैसला
ख़बर तफ्तीश रुद्रपुर।
वर्ष 2021 में हुए सनसनीखेज सगे भाई गुरपेज-गुरकीरत हत्याकांड में तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश ने हत्यारे को सश्रम आजीवन कारावास और दरोगा भाई को छह माह का कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता लक्ष्मी नारायण पटवा ने बताया कि मलसी लंका निवासी अजीत सिंह ने मुकदमा पंजीकृत कराया था कि उसकी सवा दो एकड़ भूमि प्रीत नगर में भी है और जमीन के सटी भूमि राकेश मिश्रा उर्फ पप्पू मिश्रा की भी है। बताया कि राकेश अपने उत्तराखंड पुलिस में तैनात दरोगा भाई राजेश मिश्रा के साथ मिलकर औने-पौने दामों पर खरीदने की षड्यंत्र रच चुका था और बार-बार विवाद का भूमि हड़पने की कोशिश कर रहा था। विवाद निपटाने के लिए उसके द्वारा भूमि हद में सीमेंट के खंभे लगाकर यूकेलिप्टिस लगा दिए। बावजूद इसके अभियुक्त राकेश मिश्रा विवाद करता रहा। 15 जून 2021 की दोपहर उसके बेटे गुरपेज सिंह और गुरकीरत सिंह खेत में काम कर रहे थे कि अभियुक्त अपने भतीजों के साथ आता है और अभद्रता करते हुए राइफल से अंधाधुंध गोलीबारी करता है और दोनों बेटों को गोलियों से भूनकर निर्मम हत्या कर देता है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर नामजद रिपोर्ट पंजीकृत की। दोहरे हत्याकांड की सुनवाई तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश चंद्र आर्य की अदालत में हुई। जहां एडीजीसी ने 19 गवाह पेश किए। दलीलें सुनने के बाद अदालत ने हत्याकांड के दोषी राकेश उर्फ पप्पू मिश्रा को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जबकि आर्म्स एक्ट के तहत दरोगा भाई राजेश को छह की सजा सुनाई।
———————-
कोड
सजा के प्रश्न पर फांसी की मांग
रुद्रपुर। सगे भाई गुरपेज-गुरकीरत हत्याकांड के सरकारी अधिवक्ता सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता लक्ष्मी नारायण पटवा ने बताया कि अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सजा के प्रश्न पर उनके द्वारा हत्या के दोषी को फांसी की सजा देने की मांग की,क्योंकि यह जघन्य हत्याकांड था और हत्याकांड ने एक बुजुर्ग पिता से बेटों का सहारा छीन लिया था। बावजूद इसके अदालत का निर्णय ठीक है।
——————
कोड
137 पन्ने,52 साक्ष्य रिपोर्ट,19 गवाह
रुद्रपुर। गुरपेज और गुरकीरत हत्याकांड मानवीय दृष्टिकोण के साथ-साथ जघन्य हत्याकांड भी था। यहीं कारण था कि पुलिस ने भी हत्याकांड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं छोडा। जो अभियुक्तों को राहत दे सके। दोहरे हत्याकांड की विधिक सुनवाई जहां 137 पन्नों की हुई। वहीं पुलिस ने फॉरेंसिक,तकनीकी और मैनुअल तफ्तीश की चार्जशीट 52 पन्नों की थी। साथ ही हत्याकांड के चश्मदीद,विवेचना अधिकारी  व बुजुर्ग पिता के बयान सहित 19 गवाहों ने गवाही दी।
——————–
कोड
दरोगा भाई की थी 315 बोर राइफल
रुद्रपुर। पुलिस तफ्तीश में यह सामने आया कि जिस राइफल से सगे भाईयों को गोलियों से भूनकर निर्मम हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। वह राइफल हत्यारे राकेश मिश्रा के दरोगा भाई राजेश की थी और उसी राइफल से ही गोलिया चलाई गई थी। जिसकी पुष्टि फॉरेंसिक रिपोर्ट में भी हुई। यहीं कारण है कि अदालत ने आर्म्स एक्ट के तहत बर्खास्त दरोगा को छह माह का कारावास की सजा सुनाई। 
—————-