नौ माह की ट्रेनिंग,दस हजार सैलरी,फिर होते है अश्व तैयार
-राजस्थान-दिल्ली से खरीदे जाते है अश्व
-पुलिस अकादमी में होता है कठिन प्रशिक्षण
खबर तफ्तीश रुद्रपुर।
पुलिस नियमानुसार पुलिस विभाग में सिपाही बनने से पहले कठिन ट्रेनिंग का प्रावधान है। उसी प्रकार जब घुड़सवार पुलिस दस्ता में शामिल होने से पहले एक अश्व को भी कठिन ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है। यहीं कारण है कि मासिक मानदेय और नौ माह की ट्रेनिंग दी जाती है।
दरअसल घुड़सवार पुलिस दस्ता में शामिल होने से पहले साढ़े तीन साल की आयु में दिल्ली,राजस्थान,रामपुर और हेमपुर से बेहतर नस्ल के घोड़ों को खरीदा जाता है और फिर मुरादाबाद, पंजाब,पंचकुला सहित पुलिस एकेडमी ट्रेनिंग सेंटर भेजा जाता है। नौ माह के कठिन परिश्रम के बाद प्रशिक्षित नर या मादा घोड़ों प्रदेश पुलिस मुख्यालय रिपोर्ट भेजी जाती है और फिर प्रशिक्षण प्राप्त घोड़ों को जिला पुलिस के सुपुर्द किया जाता है। यहीं कारण है कि पुलिस लाइन स्थित घुड़सवार पुलिस दस्ते में शामिल अश्व के रखरखाव सहित स्वास्थ्य परीक्षण के लिए प्रतिमाह 10 हजार रुपये का मानदेय देती है। पुलिस आरक्षी की भांति प्रतिदिन परेड,स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाता है और इन सभी प्रक्रिया के बाद अश्व को पुलिस विभाग का अंग बनाया जाता है।
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घुड़सवार पुलिस दस्ता रहता है मुस्तैद
रुद्रपुर। नौ माह की कठिन ट्रेनिंग के बाद ट्रेड अश्व हमेशा ड्यूटी के लिए तैयार रहते है। जैसे ही वीवीआईपी कार्यक्रम हो या फिर शांति व्यवस्था की सूचना आती है। घुड़सवार पुलिस दस्ता रवाना हो जाता है। महाकुंभ में प्रशिक्षण प्राप्त अश्व की भूमिका अहम रहती है और दिन-रात मेहनत कर अपने दायित्वों का निवर्हन करता है घुड़सवार पुलिस का दस्ता।
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प्रतिमाह माह होता है मौका मुआयना
रुद्रपुर। सीओ लाइन डीआर वर्मा ने बताया कि जिस प्रकार एक सिपाही कठिन परिश्रम का पुलिस विभाग का हिस्सा बनता है। उसी प्रकार घुड़सवार पुलिस का दस्ता विभाग का अंग बनता है। प्रतिमाह पुलिस लाइन स्थित अस्त बल का मौका मुआयना होता है और रखरखाव के साथ खानपान का भी विशेष ध्यान रखा जाता है।
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