पीआरडी जवान को बना दिया शव विच्छेदन कर्मचारी
-महज एक कर्मी के हवाले है पीएम हाउस
-होने चाहिए तीन कर्मी, कैसे सुधरेगा सिस्टम
मनोज आर्य,रुद्रपुर।
खबर तफ्तीश। पोस्टमार्टम हाउस की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात एक पीआरडी जवान कब शव विच्छेदन कर्मी बन गया। इससे स्वास्थ्य विभाग बेखबर हैं। आलम यह है कि पोस्टमार्टम हाउस में तीन कर्मचारियों की आवश्यकता है,लेकिन एक पीआरडी के कंधों पर शव विच्छेदन कि जिम्मेदारी डाल रखी है और जवान तनख्वाह पीआरडी विभाग से ले रहा है।
दरअसल कोविड काल वर्ष 2019 को जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा पीआरडी जवान मनीष कुमार की पोस्टमार्टम हाउस में तैनाती की थी और जिम्मेदारी यह थी कि पोस्टमार्टम हाउस की सुरक्षा व्यवस्था की,लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने जवान को शव विच्छेदन की ड्यूटी दे डाली और पीआरडी जवान पिछले छह साल से लगातार शवों की देखभाल और विच्छेदन करता रहा और कई बार पत्राचार भी करता रहा कि उसे पोस्टमार्टम हाउस का स्थाई बना दे या फिर तेनाती स्थल को बदल दे। पीआरडी मनीष ने बताया कि उसे डीपीओ विभाग द्वारा ट्रेजरी के माध्यम से 18 हजार मानदेय दिया जाता हैं और वह छह साल से अकेले की काम कर रहा है,जबकि पोस्टमार्टम हाउस में तीन कर्मचारियों की आवश्यकता है। बताया कि हर रोज दो से तीन शवों का पोस्टमार्टम होता हैं। ऐसे में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता हैं। कई बार पत्राचार भी किया,लेकिन को समाधान नही हुआ। अब इसे सिस्टम की लापरवाही कहे या फिर मुख्यालय के अधिकारियों की उदासीनता। यही वजह है कि पोस्टमार्टम हाउस बदहाली पर रो रहा है।
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छुट्टी को तरसता पीआरडी कर्मी
रुद्पुर। पीआरडी जवान से शव विच्छेदन कर्मी बने मनीष का कहना है कि स्टाफ़ की भारी कमी की वजह से उसे छुट्टी के लिए तरसना पड़ता हैं, क्योंकि पोस्टमार्टम हाउस की ड्यूटी 24 घटे की हैं और कभी कभी देर रात को भी शव रखने के लिए आना पड़ता हैं और छुट्टी का आवेदन पर छुट्टी नही मिल पाती हैं। लगातार काम करने पर मानसिक दवाब का सामना कर ना पड़ रहा है।
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जल्द पूरे होंगे पोस्टमार्टम हाउस के मानक
रुद्रपुर। सीएमओ डॉ एसके गोस्वामी ने बताया कि यह सत्य है कि पोस्टमार्टम में तैनात कर्मी पीआरडी का जवान हैं और पीआईएस हाउस में स्टाफ की कमी है। जिसको लेकर उनके द्वारा स्वास्थ्य मुख्यालय को पत्राचार किया है और पोस्टमार्टम हाउस को मेडिकल कॉलेज में शिफ़्ट करने के साथ ही सभी मानक भी पूरे करने के प्रयास जारी हैं।
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