44 शवों का हुआ अंतिम संस्कार,नाम अब भी गुमनाम
-जिले में मिले थे 65 अज्ञात शव,21 की पहचान
-एक वर्ष के आंकड़े आए सामने,अभी है उम्मीद
खबर तफ्तीश रुद्रपुर।
हर कोई चाहता है कि उसके मरने के बाद उसका कंधा देना वाला अपना कोई हो और उसका अंतिम संस्कार भी नाम के साथ हो,गुमनामी के साथ नहीं। ऐसे ही चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए है और लगभग 32 फीस दी शिनाख्त हो पाई है। बावजूद बाकी अज्ञात शवों को नियमानुसार दाह संस्कार हो चुका है और पुलिस डीएम रिपोर्ट को सुरक्षित रखती है।
यूपी से सटा उत्तराखंड का जिला मुख्यालय ऊधमसिंह नगर है। जहां अपराध के साथ-साथ अज्ञात शवों के मिलने का सिलसिला भी तेजी से बढ़ रहा है। यहीं कारण है कि जनवरी से दिसंबर 2025 के आंकड़ों पर नजर डाले। तो यह पाया कि एक साल के अंदर जिले में 65 अज्ञात शव मिले है और जिसमें 21 शवों की पहचान हुई है और शिनाख्त का ग्राफ महज 32 फीसदी ही है। सबसे ज्यादा शव मिलने वाली कोतवाली काशीपुर है। जहां अलग-अलग थाना-चौकी इलाके में 22 अज्ञात शव मिले है और घटनास्थल यूपी सीमावर्ती इलाका रहा है और 22 अज्ञात शव कोतवाली रुद्रपुर से लेकर अन्य थाना-चौकियों का है। काफी प्रयासों के बाद भी 44 शवों की शिनाख्त नहीं हुई। तो पुलिस ने नियमानुसार सभी का दाह संस्कार कर दिया और 44 शव एक वर्ष बाद भी गुमनामी के साथ उनका इतिहास भी दफन हो गया।
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तो क्या सभी अज्ञात शव थे बाहरी
रुद्रपुर। काशीपुर के जसपुर,कुंडा,बाजपुर और आईटीआई में सबसे ज्यादा अज्ञात शव मिलने के आंकड़े सामने आए है। नियमानुसार पुलिस 72 घंटे तक शवों की शिनाख्त करेगी और उसके बाद सम्मानपूर्वक दाह संस्कार करती है। हालांकि पुलिस शिनाख्त में कोई कोर कसर नहीं छोड़ती है। ऐसे में यह माना जा सकता है कि थाना-कोतवाली इलाके में मिलने वाला अज्ञात शव दूसरे जिले या प्रदेश का हो सकता है और उसकी स्थानीय स्तर पर कोई पहचान नहीं हो होगी। जिस कारण पुलिस शिनाख्त नहीं कर पाई।
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बोले एसएसपी:-पुलिस करती है लगातार प्रयास
रुद्रपुर। एसएसपी अजय गणपति कुंभार ने बताया कि नियमानुसार किसी भी अज्ञात शव की शिनाख्त नहीं होने पर पुलिस 72 घंटे बाद दाह संस्कार करती है और शव का डीएनए सैंपल सुरक्षित कर लेती है। फोटोग्राफी संलग्न होते है और बार-बार यही कोशिश करती रहती है कि शायद अज्ञात का परिचित आए और डीएनए के माध्यम से उसकी पहचान हो सके। एक बार फिर अज्ञात शव मामले में सत्यापन की मुहिम चलाई जाएंगी।
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