दीवान हत्याकांड:-हत्यारे बेटे को कठोर आजीवन कारावास
-वर्ष 2023 में चाकुओं से गोदकर की थी हत्या
-13 गवाहों ने दी गवाही,शांतिपुरी का था हत्याकांड
ख़बर तफ्तीश,रुद्रपुर। वर्ष 2023 में हुए दीवान गिरि हत्याकांड के हत्यारे दोषी बेटे को तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश ने कठोर आजीवन कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड देने की सजा सुनाई। अदालत में 13 गवाहों ने अपनी गवाही दी और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना निर्णय दिया।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी लक्ष्मी नारायण पटवा ने बताया कि थाना पंतनगर के शांतिपुरी एक निवासी चंदन गिरी गोस्वामी ने मुकदमा पंजीकृत कराया था कि दो मार्च 2 023 को उसका बड़ा भाई रात्रि नौ बजे घर पर आता है और बुजुर्ग मां से लेनदेन को लेकर विवाद करता है। जब परिवार ने समझाने की कोशिश की। तो बडा भाई हाथापाई शुरू करने लगा। जिसे देखकर उसके पिता दीवान गिरि ने बड़े बेटे को समझाने का प्रयास किया और बीच बचाव की कोशिश की। इसी दौरान बडे भाई भजमन गिरि निवासी शांतिपुरी ने धारदार चाकू से पिता को गोदना शुरु कर दिया और गंभीर अवस्था में घायल को किच्छा के सरकारी अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। जघन्य हत्याकांड की सुनवाई तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश चंद्र आर्य की अदालत में हुई। जहां एडीजीसी ने अदालत में 13 गवाहों की गवाही कराई और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पिता के हत्यारे दोषी बेटे भजमन गिरि को कठोर आजीवन कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड देने की सजा सुनाई।
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झकझोर देने वाला था हत्याकांड
रुद्रपुर। दो मार्च 2023 की रात्रि वास्तव में चंदन गिरी परिवार के लिए झकझोर देने वाली घटना थी। जिस वक्त सगा बड़ा भाई मां माया देवी से प्रॉपर्टी का विवाद कर रहा था और बहन भावना व बहू बबीता समझा रही थी। उस वक्त अभियुक्त हाथापाई करने लगा। जैसे ही पिता ने टोका । वैसे ही हत्यारे बेटे ने चाकू से पिता पर कई प्रहार कर डाले। बताया जाता है कि परिवार के लोग हाथ जोड़ते रहे और बेटा खूनी खेल खेलता रहा और दर्दनाक मौत दे डाली।
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भाई के खिलाफ दी ठोक के गवाही
रुद्रपुर। दीवान गिरि हत्याकांड में मार्मिक पल उस वक्त थे। जब हत्यारा कोई और नहीं,बल्कि खुद बड़ा भाई था और परिवार उसके सुख-दुख में साथ खड़ा रहता था। एडीजीसी लक्ष्मी नारायण पटवा ने बताया कि हत्याकांड की पैरवी को लेकर मुकदमा वादी चंदन व उसका परिवार बेहद संजीदा था। हर सुनवाई में आना और हर बार हत्यारे भजमन के खिलाफ गवाही देना। वहीं पुलिस की तफ्तीश और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद अदालत ने भी काफी देर तक दलीलें सुनी और अपना फैसला सुनाया और हत्याकांड में अहम गवाह परिवार के सदस्यों को ही माना।
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