दुखद:-विधवा मां का था सहारा,बहनों का था लाडला

-13 साल पहले हो चुकी थी पिता की मौत
-142 घंटे का संघर्ष,आंसुओं में डूबा गांधी कॉलोनी
खबर तफ्तीश रुद्रपुर।
-पिछले 142 घंटे से जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते अभिषेक की मौत होने के बाद एक विधवा मां के बुढ़ापे का सहारा टूट गया,जबकि अभिषेक तीन बहनों का दुलारा भी था। पिछले सात दिनों से जिस अभिषेक के ठीक होने की दुआएं हो रही थी। वहीं उसकी मौत की खबर मिलते ही पूरा गांधी कॉलोनी आंसुओं के समंदर में डूब गया और हर कोई परिवार को समझाने और संभालने की कोशिश कर रहा था।
बताते चले कि गांधी कॉलोनी के रहने वाले 20 वर्षीय अभिषेक वाल्मीकि के पिता नरेश वाल्मीकि की 13 साल पहले मौत हो चुकी थी। इकलौते बेटे और तीन बेटियों का भरण पोषण करने के लिए मां ने पर्यावरण की नौकरी की। चूंकि एक विधवा मां पूजा देवी का अभिषेक बुढापे का एक मात्र सहारा था । इकलौता भाई होने के कारण अर्चना,संजना और सपना बहनों का दुलारा भी था। सात अगस्त को हादसा होता है और 13 अगस्त तक अभिषेक 142 घंटे तक जिंदगी की जंग लड़ता रहा। मां-बहनों को भी यह उम्मीद थी कि शायद उनका लाडला ठीक होकर आएगा और मां-बहनों को गले लगाएंगा। घा यल के ठीक होने की आस रुद्रपुर ही नहीं,बल्कि बस्ती को भी थी। रोज दुआए होती थी और जैसे ही गुरुवार को मौत की खबर मिली। पूरा गांधी कॉलोनी आंसुओं के सैलाब में डूब गया। मां-बहनों का रो रोकर बुरा हाल है।
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