हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को देना होगा 4.72लाख हर्जाना
-बीमारी के दौरान कैशलेस नहीं हुआ उपचार
-जिला उपभोक्ता फोरम ने सुनाया फैसला
ख़बर तफ्तीश रुद्रपुर।
काशीपुर की रहने वाली एक बीमाधारक महिला के उपचार में कैशलेस की सुविधा नहीं देना हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को महंगा पड गया। जिला उपभोक्ता फोरम की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद परिवादी बीमा कंपनी को 4.72 लाख रुपये का हर्जाना,क्षतिपूर्ति और वाद व्यय देने का आदेश दिया।
बताते चले कि गढ़ीनेगी गणेश नगर काशीपुर निवासी शिवम कालड़ा और अंशिका कालरा उर्फ गुलाटी ने जिला उपभोक्ता फोरम में एक वाद दायर किया। बताया कि उनके द्वारा परिवार की सदस्य सुनीता कालडा का नीवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी से हेल्थ पॉलिसी ली थी। जिसका वैधता एक अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 थी। समयावधि समाप्त होने पर पांच जून 2025 को पुन: पॉलिसी को चालू रखा। इसी दौरान बीमाधारक सुनीता की तबीयत बिगड़ी और काशीपुर के डॉक्टरों ने दिल्ली हायर सेंटर रेफर कर दिया। जहां बीमाधारक कई दिनों तक भर्ती रही और बीमारी से जूझती रही। जैसे ही बीमा कंपनी को कैशलेस की सुविधा देने का आवेदन ऑनलाइन किया। कंपनी ने आवेदन को निरस्त कर दिया,जबकि शर्तो के अनुसार बीमाधारक का दस लाख रुपये रिस्क कवर था। हालत बिगड़ने पर ऋषिकेश एम्स ले जाया गया। जहां आयुष्मान कार्ड से उपचार कराया,लेकिन उपचार के दौरान बीमाधारक सुनी ता कालडा का निधन हो गया। याचिकाकर्ता का आरोप था कि यदि बीमा कंपनी समय रहते कैशलेस की सुविधा देती। तो शायद बीमाधारक जीवित होती। मामले की सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ताओं की खंडपीठ के अध्यक्ष राजीव कुमार खरे,सदस्य नवीन चं द्र चंदोला,डॉ मनीला ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी और निर्णय दिया कि हेल्थ बीमा कंपनी को 4.72 लाख रुपये की धनराशि छह फीसदी ब्याज दर के हिसाब से देने,पांच हजार क्षतिपूर्ति और दो हजार रुपये वाद व्यय देना होगा।