खाकी की मजबूरी,प्राइवेट गार्ड से कैसी होगी उद्योगों की सुरक्षा
-सिडकुल इटरप्रिन्योर सोसाइटी है बेहद चितिंत
-चौकी को सिडकुल थाना बनाने की उठ चुकी है आवाज
मनोज आर्या,रुद्रपुर।
जहां एक ओर सिडकुल चौकी में महज एक चौकी प्रभारी सहित छह पुलिस कर्मियों की तैनाती है। वहीं 470 कंपनियों की सुरक्षा और डेढ लाख से अधिक वर्कर्स की सुरक्षा को लेकर सिडकुल इंटरप्रिन्योर वेलफेयर सोसाइ टी भी बेहद चितिंत है। कई बार पुलिस व्यवस्था बढ़ाने का मुददा उठाते-उठाते। जब उद्यमी थक गए। तो उन्होंने प्राइवे ट गार्डो के सहारा लिया,लेकिन लंबा चौडा इलाका होने के कारण चुनिंदा गार्ड भी कुछ नहीं कर पाते है और शाम ढल ते-ढलते औद्योगिक आस्थान इलाके में अपराधियों की आवाजाही भी शुरू हो चुकी है।
बताते चले कि वर्तमान में सिडकुल में 470 कंपनिया संचालित है और तकरीबन डेढ लाख से अधिक वर्कर्स काम करते है। हर रोज करोडों का सामान या फिर नकद निकासी भी होती रहती है और कंपनियों के मालिक भी आते-जाते रहते है। राज्य गठन के बाद प्रदेश सरकार द्वारा मेटिनेस का सालना चार्ज शुरु किया था और उसकी एवज में बिजली,पानी, सडक और सुरक्षा गार्ड देने का समझौता किया था,लेकिन पिछले दस साल से सिडकुल की स्थिति यह हो चुकी है कि सुरक्षा गार्ड देना तो दूर। मूलभूत सुविधाओं के लिए उद्यमी तरस रहे है। हालात यह है कि रात का अंधेरा होते ही महि ला कर्मी हो या पुरुष वर्कर। भयभीत हो सफर करता है,क्योकि सिडकुल की सुरक्षा करने वाली सिडकुल चौकी कर्मि यों की इतनी संख्या नहीं है कि वह डेढ लाख की आबादी श्रमिक को संभाल सके। जिसको लेकर उद्यमी भी कई बार सीएम और डीजीपी को पत्र लिखकर अपना मुददा उठाया। साथ ही सिडकुल चौकी के स्थान पर सिडकुल थाना बना ने का मुददा भी उठा चुके है। आखिरकार हार थक कर उद्यमियों ने मेटिनेस देने के बाद भी प्राइवेट सुरक्षा कर्मी की तैनाती की और एरिया बडा होने के हिसाब से बेहद कम भी है।
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पिछले दस सालों से बढ रहा है अपराध
पिछले दस सालों से सिडकुल एरिया अपराध का गढ बनता जा रहा है। वारदात छोटी हो या फिर बडी। कई घटनाएं हो भी चुकी है। सबसे ज्यादा सिडकुल कर्मी हादसे का शिकार हो रहे है। जिसका मुख्य कारण यह है कि सिडकुल चौकी में करीब 30 से 40 पुलिसकर्मियों की तैनाती होती है। तो शायद अपराध व हादसों को रोका जा सकता था,लेकिन मह ज एक दरोगा व छह पुलिस कर्मियों के सहारे सुरक्षा करना संभव ही नही है। जिसको लेकर कई बार पत्राचार भी कि या जा चुका है और हमेशा किसी वर्कर के साथ वारदात नहीं हो। कंपनी प्रबंधन चितिंत रहता है।
श्रीकर सिन्हा,सिडकुल इंटरप्रिन्योर वेलफेयर सोसइटी अध्यक्ष
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सीएम हो या फिर डीजीपी तक उठाया है मुददा
सिडकुल स्थापित होने के वक्त शासन-प्रशासन हर सुविधा का ध्यान रखा जाता था,क्योकि सालना मेटिनेस चार्ज लिया जाता है,लेकिन कुछ सालों से सिडकुल की अनदेखी इतनी भारी पड रही है और आर्थिक नुकसान के साथ ही श्रमिक सुरक्षा भी चिंता का विषय है। सिडकुल चौकी को कोतवाली या थाना सिडकुल बनाने का मुददा सीएम हो या फिर डीजीपी तक उठाया जा चुका है। हकीकत यह है कि थाना पंतनगर सिडकुल से कई किलोमीटर है और सबसे ज्यादा जरुरत भी सिडकुल को। ऐसा प्रस्ताव भेजा था कि पंतनगर थाने को सिडकुल के अंदर बनाया जाए। तो कम मैन पॉवर भी काम हो सकता है,लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया। बावजूद पत्राचार जारी है।
अजय तिवारी,संरक्षक,सिडकुल इंटरप्रिन्योर वेलफेयर सोसाइटी