खुलेआम पानी से भी सस्ता मिल रहा कच्ची शराब का जहर

-शाम ढलते ही मदहोश हो जाता है इलाका
-आखिर क्यों पुलिस-आबकारी ने मूंदी आंखे
खबर तफ्तीश,रुद्रपुर।
घनी आबादी वाला इलाका थाना ट्रांजिटकैप। जहां रुद्रपुर विधानसभा का एक बड़ा हिस्सा इसी इलाके में रहता है और दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार की जीविका चलाता है। इसी आबादी में रहने वाले ज्यादातर पुरुष पानी से भी सस्ती मिल रही कच्ची शराब की थैली पीकर अपनी मौत की प्रतीक्षा करते है और हालात यह है कि जैसे ही शाम ढलती है। इलाका नशेड़ियों और अराजक तत्वों से सक्रिय हो जाता है और ऐसा कोई मार्ग नहीं होता है। जहां पर एक नशेड़ी सड़क पर पड़ा नहीं होगा। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या शराब माफियाओं के बारे में स्थानीय पुलिस या फिर आबकारी विभाग को कोई भनक नही। क्या जिम्मेदार विभाग का यह दायित्व नहीं कि माफियाओं की धरपकड़ करें और इलाके में जागरूकता अभियान चलाकर सजग करे।
रुद्रपुर विधानसभा का एक बड़ा वोट बैंक ट्रांजिट कैंप इलाके में रहता है। घनी आबादी वाले इस थाना इलाके में चार से पांच निगम वार्ड भी आते है। यानी ट्रांजिट कैंप से लेकर जगतपुरा का इलाका भी इसी में है। अब बात करे यहां के रहने वाले हजारों परिवार की। ज्यादातर परिवार की जीविका दिहाड़ी मजदूरी है और खासतौर पर ऐसे परिवार की महिलाएं हो या उनके छोटे-छोटे बच्चे। दिहाड़ी मजदूरी को विवश हे। जिनके पिता या भाई कच्ची शराब का लती हो चुका है। इ सका मुख्य कारण यह है कि अंग्रेजी शराब के दाम ऐसे नशेडी की जेब ढीली कर सकते है। तो ऐसे में कच्ची शराब ही बेहतर विकल्प होता है। जिसके दाम 20 रुपये या फिर 40 रुपये वाली पानी की बोतल से भी कम है। यानी 20 रुपये से लेकर 50 रुपये में अध्धी बोतल आ ही जाती है,लेकिन उसके अंदर कितना खतरनाक जहर होगा। इसका इल्म न शेडी को नही।
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घर की चिंता नहीं,सड़क बना आशियाना
रुद्रपुर। ट्रांजिट कैंप के सभी वार्डो का यह हाल है कि सुबह के वक्त कच्ची शराब के लती नशेड़ी दिहाड़ी मजदूरी कर चंद रुपये कमा लेते होगे। वो भी दिहाड़ी मिल जाती होगी तब। शाम छह बजे जैसे ही अंधेरा होता है। तो ट्रांजिट कैंप की गलिया महखाने में तब्दील हो जाती है। हर नुक्कड़-मोड़ पर शराब माफिया खुलेआम नशेड़ियों को थैली थमा देते है और स्पेशल ऑफर में नमक या आचार का टुकड़ा भी दिया जाता है। रात्रि आठ बजते ही नशेड़ी या तो सड़क पर पडा मिलेगा या फिर एक-दूसरे और परिवार से झगडा करता हुआ दिखाई देगा। स्थिति बेहद नाजुक है और समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया। तो वो दिन दूर नहीं, जब इलाके में संगीन घटनाएं भी हो सकती है।
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नशे का हब बनता जा रहा है इलाका
रुद्रपुर। स्थानीय बाशिंदों का यह भी कहना है कि ट्रांजिट कैंप में ही तीन से चार देशी-विदेशी मदिरा की दुकान है। इस के अलावा कई स्थानों पर कार्यालय खोलकर कच्ची शराब को बेचा जाता है। यह तो सिर्फ शराब की बात चल रही है। इसी वार्ड में ऐसा कोई नशा नहीं होता है। जो थोड़ी मशक्कत करने के बाद मिलता नहीं हो। यहां तक कि स्मैक,गांजा, अफीम व प्रतिबंधित नशे की गोलियों ने इलाके को तबाह कर दिया है। यहीं कारण है कि घनी आबादी होने का फायदा उठाकर नशा माफिया नशा बेचते है और बड़े ही आराम से मोटा मुनाफा देकर निकल पडते है।
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बोले अधिकारी:-होती रहती है धरपकड़ की कार्रवाई
रुद्रपुर। पानी से भी सस्ती कच्ची शराब मामले में जब सीओ सदर विभव सैनी और प्रभारी जिला आबकारी अधिकारी महेंद्र बिष्ट से पूछा। तो अधिकारियों का कहना था कि पुलिस हो या फिर आबकारी विभाग। लगातार ट्रांजिट कैंप ही नहीं,बल्कि निगम इलाके में छापामार कार्रवाई करती है। कई बडे माफियाओं पर कठोर कार्रवाई कर चुके है और क च्ची शराब सहित हर मादक पदार्थों की धरपकड़ मुहिम चलाती है। बावजूद इसके आबकारी,पुलिस व एएनटीएफ अब मिलकर रणनीति बना रहे है। जो बडे नशा माफियाओं को चिन्हित कर गुंडा एक्ट में निरुद्ध करेगे। जल्द ही एक बडा अभियान चलाकर नशामुक्त इलाका बनाने का प्रयास किया जाएंगा।
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