Headlines

साइबर क्राइम का एक ही थाना,नाकाफी है स्टाफ कर्मी

साइबर क्राइम का एक ही थाना,नाकाफी है स्टाफ कर्मी

-कैसे होगी तकनीकी-मैनुअल की तफ्तीश

-महज 20 से 25 ही पुलिसकर्मी कर रहे जांच

खबर तफ्तीश रुद्रपुर।

आधुनिकता की दौर में जहां शातिर अपराधियों ने अपराध का तरीका बदल दिया है,लेकिन उसकी रोकथाम करने वाली साइबर क्राइम थाना पुलिस अभी भी स्टाफ की कमी से जूझ रही है। यहीं कारण है कि साइबर क्राइम जैसी तकनीकी अपराध की तफ्तीश करने में कई माह बीत जाते है और साइबर अपराधी दूसरे घटना को अंजाम दे डा लते है। जिसका मुख्य कारण यह है कि रुद्रपुर नैनीताल हाईवे स्थित साइबर क्राइम थाने पर पूरे कुमाऊं मंडल के साइबर अपराध का भारी दबाव है। वहीं स्टाफ की कमी भी साइबर क्रिमिनल के हौसले बढा रही है।

बताते चले कि वर्ष 2021 में साइबर अपराध की रोकथाम के लिए नैनीताल हाईवे स्थित साइबर क्राइम थाना पुलिस स्टेशन बनाया गया। साइबर क्राइम थाना पुलिस को कुमाऊं मंडल के साइबर अपराध की तफ्तीश और मुकदमा पंजीकृत व खुलासे की जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन जिस हिसाब से  कुमाऊं मंडल की आबादी और क्षेत्रफल के हिसाब से वर्तमान में साइबर क्राइम थाने में पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मी तैनात नहीं है,जबकि इस थाने के तहत कुमाऊं के छह जिले आते है। प्रत्येक जिले में होने वाली 20 से अधिक की साइबर ठगी के प्रकरणों की तफ्तीश साइबर क्राइम थाना पुलिस करेगी। ऐसा शासन व पीएचक्यू का आदेश है। वर्तमान में साइबर थाने में थाना प्रभारी सहित तीन निरीक्षक,चार दरोगा और महज 20 पुलिस कर्मी है,जबकि हकीकत यह है कि छह जिलों वाले साइबर क्राइम थाने में छह निरीक्षक सहित 50 से 60 उपनिरीक्षक और पुलिस कर्मियों की आवश्यकता है। ताकि हर साइबर ठगी मामले में एक टीम विशेष तौर पर अपनी तफ्तीश करे और दूसरे अपराध होने से पहले ही उसको नियंत्रित कर सके। अब सवाल यह है कि क्या चुनिंदा पुलिस कर्मी छह जिलों वाले कुमाऊं साइबर क्राइम थाने के साइबर अपराध का दबाव झेल पाएगी या नहीं। यह वास्तव में सोचनीय विषय है।

———————

कोड

बेहद जटिल-तकनीकी होती है तफ्तीश

रुद्रपुर। जब किसी भी थाना इलाके में लाखों या फिर करोड़ों की साइबर ठगी होती है। तो पीड़ित हमेशा यह चाहता है कि उसकी रकम जल्द वापस हो और साइबर क्रिमिनल की गिरफ्तारी हो,लेकिन यह तभी संभव होगा। जब पूरी एक टीम दिन-रात कड़ी मेहनत कर उसकी तफ्तीश करे। क्योकि साइबर क्राइम की जांच बेहद जटिल और तकनीकी होती है। जो अपराधी अपराध कर रहा है। उसका खाता,मोबाइल नंबर, उसकी आईडी सहित हर दस्तावेज फर्जी होते है। ऐसे में उसको खोज निकालना उतना ही कठिन है। जैसे रेत के ढेर में सुई की खोज करना। यहीं कारण है कि साइबर अपराधी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे है और हमारी साइबर क्राइम थाना पुलिस व्यवस्था को लेकर भारी दबाव झेलने को विवश है।

——————

कोड

वर्ष 2022 के बाद आई साइबर ठगी में तेजी

रुद्रपुर। अगर आंकड़ों पर नजर डाले। तो वर्ष 2021 से 2022 तक देश-प्रदेश में साइबर क्राइम का ग्राफ बेहद कम था। उस वक्त शारीरिक रूप से अपराधी आते थे और लूटपाट-डकैती जैसे ही वारदातों को अंजाम देकर फरार हो जाते थे, लेकिन वर्ष 2023 में साइबर अपराध की ऐसी क्रांति आई कि वर्ष 2023 में महज साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में ही कु माऊ भर से 23 मामले,वर्ष 2024 में 34 मामले और वर्ष 2025 की दिसंबर माह तक 35 साइबर ठगी के मामले पंजीकृ त किये गए। वर्ष 2026 में भी कई मामले पंजीकृत हुए। वर्ष 2026 में साइबर क्रिमिनल ठगी के नये-नये हथकंडे अपनाने लगे और साइबर पुलिस को चुनौती देते रहे। 

———————–

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *