थैलेसीमिया:-अपने ही दे रहे मासूमों को द्यातक बीमारी थैलेसीमिया
-जिले में 130 मासूम है ग्रसित,सितारगंज है अव्वल
-ऊधमसिंहनगर में सबसे ज्यादा मिले है मरीज
ख़बर तफ्तीश रुद्रपुर।
ऐसा कोई भी माता-पिता नहीं चाहते है कि उनका मासूम थैलेसीमिया जैसे आनुवंशिक रक्त विकार बीमारी से ग्रसित हो,लेकिन यह भी सत्य है कि ऊधमसिंह नगर में सबसे ज्यादा थैलेसीमिया ग्रस्त बच्चों की संख्या है। जिसका मुख्य कारण यह है कि शादी से पहले अल्फा और बीटा थैलेसीमिया की जांच नहीं करना और शादी के बाद मासूम जन्मजात थैलेसीमिया की बीमारी से ग्रसित हो जाता है और माता-पिता की गलती का खामियाजा ताउम्र झेलता है।लाइलाज इस बीमारी में प्रतिमाह ग्रसित बच्चे को रक्त आधान करना पड़ता है। अन्यथा मासूम की जिंदगी खतरे में भी पड सकती है। चिकित्सकों के अनुसार इस बीमारी का समाधान केवल एक ही है कि लडका-लडकी शादी से पहले रक्त विकार की जांच कराएं और पारिवारिक रिश्तों में शादी करने से परहेज क रे।
बता दे कि थैलेसीमिया एक ऐसी बीमारी है। जो एक आनुवांशिक यानी वंशानुगत रक्त विकार है। शरीर की लाल रक्त कोशिकाओं में पर्याप्त हीमोग्लोबिन और स्वस्थ प्रोटीन बनाने की क्षमता प्रभावित हो जाती है और जन्मजात मासूम बच्चा थैलेसीमिया बीमारी से ग्रसित हो जाता है। राजकीय मेडिकल कॉलेज के आंकड़ों पर नजर डाले,तो मेडिकल कॉलेज में 130 मासूम बच्चे रजिस्टर्ड है। जिसके अंदर थैलेसीमिया बीमारी की पुष्टि हो चुकी है और प्रतिमाह मंगलवार और शुक्रवार को विशेष तौर चिकित्सकों की देखरेख में ग्रसित बच्चे को रक्ताधान किया जाता है। यह भी पता चला है कि ग्रस्त थैलेसीमिया बच्चों को यह बीमारी माता-पिता से ही मिली है,क्योकि शादी से पहले माता पिता खून के रिश्तों में शादी करते है या फिर अल्फा और बीटा थैलेसीमिया की जांच नहीं करवाई है। जिसका परिणाम यह होता है कि जन्म लेते ही मासूम माइनर या मेजर थैलेसीमिया का शिकार हो जाता है।
———————
कोड
लक्षण और उसका उपचार
रुद्रपुर। आनुवांशिक थैलेसीमिया जन्मजात बीमारी है। जैसे-जैसे मासूम बडा होता रहता है। इसमें थकान,कमजोर,पीलिया,सांस फूलना और मेजर थैलेसीमिया में जन्मजात बच्चे के शरीर की संरचना विकृत्त होने की भी प्रबल संभावना रहती है। थैलेसीमिया को माइनर व मेजर श्रेणी में रखा गया है। माइनर बच्चे को आजीवन नियमित चिकित्सा की जरूरत पड़ती है,लेकिन मेजर ग्रसित बच्चे को रक्त आधान के साथ ही नियमित रक्त आधान,आयरन चेलेशन थेरेपी,बोन मैरो ट्रांसप्लांट, प्लीहा को निकालना पड़ता है। इससे साफ है कि बाल्यावस्था से लेकर किशोरावस्था तक थैलेसी मिया ग्रस्त व्यक्ति उपचार करता रहता है,क्योकि थैलेसीमिया बीमारी स्थिर या फिर तय आयु तक रहने वाली बीमारी नहीं है।
———————
कोड
कैसे और क्यों होती है बीमारी
समाधान और कारण
रुद्रपुर। लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन होता है। जो शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। थैलेसीमिया में शरीर अल्फा या बीटा प्रोटीन श्रृंखलाओं का पर्याप्त निर्माण नहीं कर पाता है और आरबीसी जल्दी नष्ट होने लगते है और शरीर में ऑक्सीजन कमी के कारण ग्रसित बच्चे को सांस की तकलीफ होती है। थैलेसीमिया एक जन्मजात बीमारी है। माता-पिता से बच्चों में जीन के माध्यम से स्थानांतरित होती है और माता-पिता करियर यानी वाहक होते है। जो अपने ही जिगर के टुकडे के अंदर इस बीमारी का विकसित करते है।
——————
सावधान-सजगता ही है रोकथाम
रुद्रपुर। थैलेसीमिया बीमारी अक्सर माता-पिता के माध्यम से होती है। इसका सरल उपाय यह है कि भावी पीढ़ी को इस बीमारी के प्रति बेहद सावधान और सजग रहने की आवश्यकता है और शादी या फिर गर्भधारण से पहले कैरियर स्क्रीनिंग,मेजर थैलेसीमिया ग्रस्त अभिभावक को परिवार नियोजन की सलाह लेनी चाहिए,प्रीनेटल टेस्टिंग के अलावा थैलेसीमिया परीक्षण करना बेहतर उपाय और समाधान है। इसके अलावा वैवाहिक रिश्तों में बंधने से पहले लड़की हो या फिर लडका। यह जानने की कोशिश करें कि क्या वह वंशानुगत यानी आनुवंशिक रिश्ता तो नहीं है।
——————-
बोली प्राचार्य:-शादी से पहले जाने थैलेसीमिया क्या है
रुद्रपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य ऊषा रावत ने बताया कि जिले में सबसे ज्यादा सिता रगंज और रुद्रपुर इलाकों के थैलेसीमिया ग्रस्त बच्चे है। जिनका 15,21,31 दिन के अंदर रक्त आधान करना जरूरी है और वर्तमान में मेडिकल कॉलेज के अधीन 130 थैलेसीमिया ग्रस्त बच्चों को उपचार और रक्ताधान प्रतिमाह के मंगलवार और शुक्रवार को होता है। बताया कि यह बीमारी वंशानुगत बीमारी है और जन्मजात बीमारी है। ऐसे में भावी पीढ़ी को शादी से पहले थैलेसीमिया क्या है और क्यों होता है। इसको जरुर जानने का प्रयास करना चाहिए,क्योंकि जरा सी लापरवाही अपने लाडले को थैलेसीमिया का मरीज बना सकती है।
———————-